बिहार में शिक्षा और न्याय का नया कदम (सितंबर 2025)
बिहार में शिक्षा और न्याय का नया कदम (सितंबर 2025)
#. बिहार इस समय जहाँ चुनावी माहौल में व्यस्त है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा सुधार और न्याय व्यवस्था में भी नए कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार और न्यायपालिका दोनों ही अपने-अपने स्तर पर ऐसी पहल कर रहे हैं, जिनका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।
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शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल बदलाव
राज्य सरकार ने घोषणा की है कि 2026 से इंटरमीडिएट परीक्षा कंप्यूटर आधारित (CBT) कराई जाएगी।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य नकल पर रोक लगाना और पारदर्शिता बढ़ाना है।
छात्रों को अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रश्नपत्र हल करने की सुविधा मिलेगी।
शिक्षा विभाग ने जिलों में डिजिटल लैब स्थापित करने की योजना बनाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय ग्रामीण और शहरी शिक्षा के बीच की खाई को कम करेगा। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में तकनीकी संसाधनों की कमी एक चुनौती हो सकती है।
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उच्च शिक्षा में सुधार की कोशिश
बिहार सरकार ने राज्य के विश्वविद्यालयों में नई फैकल्टी भर्ती, ऑनलाइन क्लासेस और रिसर्च पर विशेष फोकस का एलान किया है।
500 से अधिक नए प्रोफेसरों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
सभी विश्वविद्यालयों में “ई-लाइब्रेरी” की सुविधा दी जाएगी।
छात्रों के लिए स्टार्ट-अप और नवाचार को बढ़ावा देने हेतु विशेष फंड का गठन किया जा रहा है।
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न्याय व्यवस्था में नया कदम
पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में आदेश दिया है कि सभी ज़िलों की अदालतों में ई-कोर्ट सिस्टम को 2026 तक पूरी तरह लागू किया जाए।
केस की सुनवाई अब डिजिटल मोड पर भी होगी।
ऑनलाइन केस स्टेटस, डिजिटल नोटिस और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई आसान होगी।
इससे लंबित मामलों की संख्या घटने की उम्मीद है।
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फास्ट-ट्रैक कोर्ट की संख्या बढ़ेगी
बिहार सरकार ने घोषणा की है कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए नए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे।
फिलहाल राज्य में 44 फास्ट-ट्रैक कोर्ट काम कर रहे हैं, जिन्हें बढ़ाकर 70 करने की योजना है।
न्याय विभाग का दावा है कि इससे पीड़ितों को जल्दी न्याय मिलेगा और अपराधियों में भय बढ़ेगा।
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जनता पर असर
1. छात्रों के लिए लाभ – डिजिटल परीक्षा और ऑनलाइन पढ़ाई से उन्हें आधुनिक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जाएगा।
2. न्यायपालिका पर भरोसा – फास्ट-ट्रैक कोर्ट और ई-कोर्ट से मामलों का निपटारा तेज़ होगा।
3. ग्रामीण-शहरी संतुलन – शिक्षा और न्याय दोनों क्षेत्रों में तकनीक की भागीदारी से ग्रामीण इलाकों तक सुविधा पहुँच सकेगी।
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निष्कर्ष
बिहार में शिक्षा और न्याय, दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव की दिशा दिखाई दे रही है।
एक ओर सरकार छात्रों के भविष्य को डिजिटल शिक्षा से जोड़ रही है।
दूसरी ओर न्यायपालिका आम नागरिक को तेज़ और पारदर्शी न्याय दिलाने के लिए नए प्रयोग कर रही है।
अगर यह योजनाएँ सही ढंग से लागू हुईं तो आने वाले समय में बिहार न केवल चुनावी राजनीति बल्कि शिक्षा और न्याय सुधार के लिए भी चर्चा में रहेगा।

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