बिहार विधानसभा चुनाव 2025: 7 सितम्बर की ताज़ा राजनीतिक हलचल
बिहार की राजनीति इस समय चुनावी माहौल में पूरी तरह सक्रिय है। मतदाता सूची, विकास परियोजनाओं, नेताओं के बयान और सीट-बंटवारे की चर्चाएँ तेज़ हो गई हैं। आइए जानते हैं आज की प्रमुख अपडेट।
मतदाता सूची में सुधार का अंतिम चरण
चुनाव आयोग के निर्देश पर Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया अब अपने अंतिम दौर में है। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 30 सितम्बर 2025 को होगा, जबकि दावे और आपत्तियों की जांच 25 सितम्बर तक पूरी कर ली जाएगी। इस बार ऑनलाइन आवेदन और BLO द्वारा घर-घर सत्यापन की व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम न छूटे।
विकास का नया अध्याय: ₹13 से ₹45 करोड़ की योजनाएँ
मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने भोजपुर और बक्सर जिलों में कई नई विकास परियोजनाओं की शुरुआत की है। इन योजनाओं की लागत ₹13 करोड़ से लेकर ₹45 करोड़ तक है। इनका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर को बेहतर बनाना है। चुनावी मौसम में यह सरकार की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
राजनीतिक बयानबाज़ी: जीतन राम मांझी सुर्खियों में
पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने हाल ही में एक बयान दिया जिसे बाद में उन्होंने बदल दिया। इस उलझन भरे बयान ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और विपक्षी दल इसे चुनावी मुद्दा बनाने में जुट गए हैं।
प्रवासी वोटरों को साधने की रणनीति
बीजेपी ने इस बार छठ पूजा को केंद्र में रखते हुए प्रवासी वोटरों तक पहुँच बनाने की योजना बनाई है। पार्टी नेताओं ने रेल मंत्रालय से छठ पर्व के दौरान विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की मांग की है ताकि बाहर रहने वाले बिहारी आसानी से वोट डालने के लिए राज्य लौट सकें।
गठबंधन और सीट बंटवारा
महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) में सीट बंटवारे को लेकर चर्चाएँ तेज़ हैं। कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के बीच सहमति बनने की खबर है। अगले कुछ हफ़्तों में औपचारिक ऐलान होने की संभावना है।
निष्कर्ष
7 सितम्बर 2025 को बिहार की राजनीति में तीन प्रमुख मुद्दे उभरकर सामने आए — मतदाता सूची का अंतिम चरण, ₹13 से ₹45 करोड़ की विकास योजनाएँ और गठबंधन की रणनीति। इन सबके बीच बिहार की जनता आगामी चुनाव का बेसब्री से इंतज़ार कर रही है।

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